YDF Signature Campaign For Justice to Ruchika at India Gate

YDF Signature Campaign For Justice to Ruchika at India Gate
We did this signature campaign at India Gate on 10-Jan-10. Later we submitted all the signatures and general people comments to Sonia Gandhi and to Bar Counsil Of India for toughest decision against SPS Rathore.Please Click on the Picture.

Youth Democratic Front Unity Rally Lucknow

Youth Democratic Front Unity Rally Lucknow
We organised a Unity Rally in Lucknow against any division of states on the basis of language, cast or region on 20-12-09. A number of youth from various Engineering, management and other colleges participated in rally. We passed our message to general public by distributing fliers and did the protest march.Please click on Picture to see more snaps of Unity Walk In.

चुनाव के दिन अगर आप वोट नही करते हैं, तो आप सो रहे हैं ! जागो रे !

Sunday, October 16, 2011

Tuesday, February 15, 2011

बिहार - वोट की चोट

बिहार में हाल ही में संपन्न हुए विधान सभा चुनाव के परिणाम ना सिर्फ चौकाने वाले थे, बल्कि देश अन्य करोड़ों मतदाताओं को आंख खोलने व सोचने पर मजबूर कर देने वाले भी थे | भारत के सबसे पिछड़े राज्यों की श्रेणी कभी ( और शायद अभी भी ) गिने जाने वाले राज्य, जहाँ अशिक्षा , बेरोजगारी , अपराध अपने चरम पर हुआ करता है , वहा के मतदाताओं ने सबसे ज्यादा जागरूक मतदाता होने का परिचय दिया | और साथ ही बतला दिया चाहे हमे कितना ही बेवकूफ समझो, चाहे हमें कितना ही डरा धमका लो, ज़ाती और धर्म के नाम पे लम्बे चौड़े भाषण दे लो, लेकिन अब से यहाँ वोट मिलेगा तो सिर्फ विकास के नाम पर | और शायद नितीश कुमार की सरकार इसकी पात्र भी है |

एक नयी तक़दीर लिखने का जोश सा दिखा और शायद यह जरुरी भी था | यह एक सबक था सभी के लिए खास तौर से युवाओं के लिए, जो सरकार को नित आये दिन गालियाँ तो दे लेते हैं, लेकिन कभी अपने सबसे मजबूत "हथियार" अर्थात वोट का इस्तेमाल नही करते हैं | देश और विदेश के दूर दराज स्थानों में बसे हर एक बिहारी ने आकर वोट दिया, एक पर्व सा माहौल दिखा |

इस ताकत को अब दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक व सबसे युवा देश को समझना होगा | वोट देने को अपने कर्तव्यों और देश के प्रति नैतिक जिम्मेदारियों में लाना होगा | साथ ही सही जगह पर वोट दिया जाए, इसके लिए वर्त्तमान और पिछली तथा आगे संभावित सरकारों व प्रत्याशियों के बारे में अध्ययन भी जरुरी है इन हालिया चुनावों में बड़े बड़े दिग्गज ( राबड़ी देवी, साधू यादव तथा अन्य ) धराशायी हुए, साथ ही विपक्ष एक कोने में सिमट कर रह गया | यह एक सरकार के पक्ष में नितांत साफ़ सन्देश था | देश भर के सभी विकाश केध्वजवाहकों को अब एक होना होगा और साथ ही ज़ाती, धर्म, क्षेत्र , पार्टी से ऊपर उठकर पूरे दशक को देश केविकाश में देना होगा | ६० साल से भी ज्यादा समय से, सैकड़ों कल्याणकारी योजनाओं को देखने के बाद भी, देश कीहालत आज भी जस की तस है | भ्रष्टाचार ने खोखला सा कर दिया है |

और अब यह नागरिक आन्दोलन से ही संभव है | सभी मतदाताओं को इस वोट की ताकत को समझते हुए, समझदारी का परिचय देते हुए आगे बढ़ना होगा और देश हित में उपस्थित नए विकल्पों के बारे में भी सोचना होगा |

हाथ बढाएँ, हाथ मिलाएं |
समय है परिवर्तन का , युवा नेतृत्व और सोच को आगे लाने का |

सुयश दीप राय
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं महासचिव
यूथ डेमोक्रेटिक फ्रंट
www.ydfparty.org

Monday, September 6, 2010

सफरनामा !!


समय २:३४ अपरान्ह ! उना जनशताब्दी !

चंडीगढ़ वापसी के दौरान एक बार फिर से अकेले यात्रा करने का सौभाग्य मिला ! और फिर से एक बार मेरी डायरी खुल गयी ! पिछले कुछ समय से अकले यात्रा के समय लिखना मेरी आदतों में शुमार होता जा रहा है ! पहले पत्र पत्रिकाएँ पढ़ लिया करता था, लेकिन आजकल कॉमन वेल्थ गेम्स की बकबक के आलावा इन पत्रिकाओं में कुछ नही होता ( वैसे मेरी हार्दिक शुभकामनाएं कॉमन वेल्थ गेम्स और टीम के साथ है , आशा है शकुशल खेल संपन्न होंगे !) ! खैर लिखना एक बेहतर विकल्प सूझा तो डायरी निकाली और एक अधेड उम्र की थोड़ी गुस्सैल सी दिखने वाली महिला से विनम्र आग्रह करके उनकी खिडकी वाली सीट पे बैठ गया ! कभी कभी विनम्रता वास्तव में कारगर सिद्ध होती है ! एक के बाद एक लोगों का आना जाना लगा हुआ था ! एक जाने वाला तो छोड़ने वाले चार ! भारतीय रेलवे के प्लेटफोर्म की दुर्दशा का प्रमुख कारक यह भी है ! चलो छोड़ने आ गए वो ठीक लेकिन , जब तक ट्रेन चल न दे खिडकी के लोहे के डंडे पकड़ के खड़े रहेंगे ! इनका बस चले तो धक्का देके ट्रेन रवाना कर दें !

थोड़ी ही देर में ट्रेन आगे बढ़ी और एक एक करके ब्रेड कटलेट , कुरकुरे और शीतल पेय पदार्थ बेचने वालो का अत्याचार प्रारंभ हुआ ! एक जाता था, थोड़ी शांति होती थी की दूसरा आ जाता था ! कुछ बच्चे अपनी माताओं से कुकुर खाने की जिद्द में लगे हुए हैं, परन्तु जैसे ही उनके पिता घूर के देखते हैं बच्चे चुप और अजीब सी भावुक मुद्रा बना के बैठ जाते हैं !

इस अत्याचार का जैसे ही थोडा आदी हुआ, तभी कानो में कुछ बहस सुनाई दी ! हमेशा की तरह रेल , राजनैतिक और समसामयिक घटनाओं पे नजर रखने वालों के लिए बहस करने का आदर्श स्थान हुआ करती है ! नए लोग नए विचार और नयी समस्याएँ !

लेकिन बहस का मुद्दा वही कॉमन वेल्थ गेम्स ! पिछले कुछ महीनो से यह शब्द मेरे कानो में इतनी बार पड़ा है की पूछिए मत ! दिली रिश्ता सा जुड़ गया इस से ! मुझे लगता है इस दौरान पैदा हुए कुछ बच्चों का नाम न कॉमन वेल्थ गेम्स पड़ जाए ! हर तरफ चर्चा का केंद्र !

भारत के सबसे बड़े व्यापारिक समझौते – भारतीऔर जेन ( दूरसंचार ) – से बड़ा बहस का मुद्दा बना हुआ है ! असल में इस मुद्दे पे बहस करने के लिए आपको ज्यादा जानकारी रखने की जरुरत नही ! बस दिल में सरकार और व्यवस्था के प्रति जो भी भड़ास हो निकाल बाहर कीजिये ! खैर मन हुआ की बहस में शामिल होऊ लेकिन कुछ यथार्थ परक बहस दिखाई नही दी अतः अपने लेखन कार्य में लगा रहा ! बीच में दिल्ली प्रवास के दौरान जो कुछ अच्छी स्मृतियाँ थी उन्हें याद करते हुए बीच बीच में मुस्कुरा भी रहा था ! तभी उस अधेड उम्र की महिला को न जाने क्या जिज्ञासा हुई ( मेरी मुस्कराहट देख के या लेखनी देख के ) मुझे बीच में ही टोक दिया ! और अजीब से चेहरे के भाव बनाते हुए बोलीं क्या आप कविता लिख रहें हैं ! मैंने बोला मै लेखक और कवि जरुर हूँ , लेकिन फिलहाल कुछ ऐसे ही संस्मरण लिख रहा हूँ ! उसके पश्चात उन्होंने अपना परिचय दिया , और बातचीत में पता चला की मैडम इसरो की वरिष्ठ अभियंता और वैज्ञानिक हैं ! फिर उन्होंने कुछ कवितायेँ सुनाई जो हालाँकि माहौल और समय के अनुरूप नही थी लेकिन फिर भी अनुभवों का सजीव वर्णन था ! चर्चा परिचर्चा चलती रही , माहौल को भांपते हुए कुछ एक कवितायेँ सुनाकर मैंने भी वातावरण रोचक बनाने की कोशिश की !

कुछ पढ़िए तो लोग कहते हैं, आज "ग़ालिब" गज़लसरा न हुआ !!

बहस में व्यस्त लोगों के कान तक हमारी आवाज पहुँचने लगी तो कुछ और लोगों ने सुनने में रूचि दिखाई साथ ही फरमाइशों का दौर चलने लगा ! एक कवि और वक्ता को अगर मुफ्त में श्रोता मिल जाएँ तो क्या कहने ! अपनी रचनाएँ खत्म हुई तो फैज़ और ग़ालिब का दौर चलने लगा -

कोई दिन गर जिंदगानी और है , अपने जी में हमने ठानी और है !!

धीरे धीरे ये एक और तन्हा सफर यादों के साथ खतम हुआ कुछ अन्य वरिष्ठों ( ~ साभार तिवारी जी ) के शब्दों के साथ –

बड़ी आधी अधूरी ख्वाहिशों में बड़े बेचैन से इन रास्तों में
बहुत तनहा सफ़र की बोरियत में
बड़े बेजान से इन काफिलों में
मैं अपनी दुनिया ढूंढता हूँ मैं अपने रस्ते चल रह हूँ….
यही है बस मेरा सारा मुकद्दर….
यही है बस मेरी पहचान भी अब..
तुम्हें आना है मेरे साथ आओ…..तुम्हें जाना है मुझसे दूर जाओ ||

मुझे शिकवा नहीं कोई किसी से मुझे हैरत नहीं है जिंदगी से
मैं अपनी चालें चल रहा हूँ
तुम अपनी चालें चलते जाओ
यही है बस मेरा सारा मुकद्दर….

यही है बस मेरी पहचान भी अब..

तुम्हें आना है मेरे साथ आओ…..तुम्हें जाना है मुझसे दूर जाओ ||

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Wednesday, September 1, 2010

आज़ादी अवाम की


YDF Indians,
After all work on ground and activities across India YDF announcing it's exclusive youth movement
"Azaadi Avaam Ki" in 24 states. All YDF state committees are directed to get ready for national meet in Delhi.*Date will be announced soon*. An extensive program to cover every common citizen and their voice. To touch their soul. YDF Indian will drive this movement to every part.
State conveners and members of central core committee will have to present in National meet in Delhi in last September.

Basically the rough road map for "Azaadi Avaam Ki" will be like this :-


1> Nukkad natak in every state and cities ( where YDF Indians are present - in almost 24 states. we will cover 2 state each month) highlighting one National Issue.

2> Awareness campaign about RTI( Right to information ) to youths / in colleges /schools etc etc. And to bring more and more Initiative to eliminate corruption using this tool.

3> Awareness for Environment/ Pollution / Greenery.

4> Highlighting Local issues ( Road, Electricity, water or whatever is major problem in the city or in area ).

5> Bringing notice of common public and awareness among educated Youth toward many hidden problem of India's remote part (like Naxals operations, Bodo and paramilitary operations )and many more dying ancient culture of fastaly developing cities.


More Suggestion and volunteers are welcomed. Specially creative minded people to add/modify the event sequences.


Overall continuous 4-5 event series every month on each Sunday in each state.

==================== "Azaadi Avaam Ki"
* Urgently Required :
> Guys expert in designing ( logos and promotional posters as well as films and music ) are requested to contact state conveners or drop message to following id's.
> Any school or college group or other youth organisations , who want to participate may also contact.
> For online promotion and web designers may contact.

> Any economical space ( Free or cheap :) ) in Delhi for meeting of 15-20 people.

** Special Note:
We are not going to pay anything for your work for YDF. So make your mind for volunteer work. :) :)
** School / college groups and other youth organizations who want to associate with us can contact.


#### Important ## And of course any financial help will also be welcomed. :) :) Those who want to donate for the cause can also contact.

suyash.info@gmail.com
venkatsnag@gmail.com
abhi90shakti@gmail.com
ashu772611@gmail.com
====================
Regards
Suyash Deep Rai
National Vice President
& General Secretary

Youth Democratic Front | Empower Youth - Transform India

Thursday, August 12, 2010

२०१० में भारत का व्यवस्था तंत्र और हम !



आज जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि मै भारत जैसे दुनिया के सबसे अजीब देश में रह रहा हूँ ! क्या कहने इस देश के ! खैर अब आते हैं मूल मुद्दे पर ! काफी दिनों से व्यापक रूप से बहस चल रही है कि जनता बेवकूफ है जो गंदे नेताओं को चुनती है, नेता गंदे हैं, पुलिस भ्रष्ट है, सेना ऐसी है, वो वैसा है , मीडिया न जाने कैसी है , और फलां फलां फलां..!!

शर्म तब आई जब २१वि शदी की सबसे जागरूक जनता के सामने यह सब घटित होते देख रहा हूँ और हम सब इन चीजों को स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं ! चीखना चिल्लाना कब तक करे, किस से करे ? सड़क पर जाके लोगो को आप लाख बताइए , लोग फिर अगले चुनाव में वही रंग रूप दिखाएंगे ! कोई लाल रंग के पीछे भागेगा और कोई हरे तो कोई बैंगनी ! कोई पंजे कि तरफ तो कोई कमल के फूल कि तरफ ! और काहिर ये लोग भी तो वही हैं जो हम आप हैं ! मीडिया में भी वही लोग हैं हमारे आपके जैसे ! असल में ये भारत के पानी, मिटटी, हवा का असर है !" सब चलता है यहाँ " !

ममता दीदी कि लालगढ़ में आयोजित रैली पर हुई कच कच सबने देखी ! इस रैली को पी सी पी ए ( People’s Committee against Police Atrocities ) ने आयोजित किया था ! ये वही पी सी पी ए है जो कि ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस रेल हादसे और 148 लोगों कि मौत के लिए जिम्मेदार है ! और ये वही पी सी पी ए है जिसने खुले तौर पर ऐलान किया कि अब वो लोकतान्त्रिक तरीके से रैली और प्रदर्शन नही करेंगे बल्कि प्रशाशन और सुरक्षा बलों के खिलाफ हथियार उठाएंगे ! और उसकी परिणति हम सब देख चुके हैं ! खुनी हिंसा और सैकडो निर्दोष लोगों कि मौत ! ये कैसी हक कि लड़ाई है भाई !

और ऐसे समाज जहाँ सरकार के पास तंत्र है इन लोगों पर लगाम कसने के लिए, वो भी चुप ! चुनाव आयोग जो कि बहुत से सराहनीय प्रयास करता आ रहा है ऐसे अवांछनीय तत्वों को रोकने के लिए, वो भी क्यों चुप है ! क्यों न ममता दीदी पर ऐसे लोगो का खुले आम साथ देने के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी जाए !

क्या इन घटनाओं को स्वीकार करके हम ऐसे अवांछनीय तत्वों को बढ़ावा नही दे रहे ? और हमारे जवानो के मनोबल का क्या , जो अपनी जान पे खेल के इनसे लोहा ले रहे हैं दिन रात ! और शायद कुछ जवानो कि ड्यूटी उस दिन इन देश विरोधी ताकतों कि सुरक्षा में भी लगी हो !

गरीबी, बेरोजगारी, भूखमरी जैसी लाख समस्याओं के बावजूद ऐसी चीजे मन को झकझोर देती हैं ! ऐसे लोगो के लिए तिरंगे कि भी क्या कीमत होगी !

उनका सर तो सिर्फ लाल झंडे के सजदे में झुकता होगा !


समय है परिवर्तन का ! युवा नेतृत्व और सोच को आगे लाने का !!

हाथ बढ़ाएँ, हाथ मिलाएं !


~ सुयश दीप राय

यूथ डेमोक्रेटिक फ्रंट

Friday, July 16, 2010

२१ वीं सदी में ज़ाती आधारित जनगणना तात्पर्य !



ज़ाती आधारित जनगणना का वास्तविक प्रयोजन क्या है ! क्या वाकई में भारत वर्ष की वर्त्तमान वस्तु स्तिथि के किसी सुधार के लिए यह कदम उठाया गया है ! या राजनैतिक पार्टियों के व्यक्तिगत ज़ाती आधारित वोट बैंक में सेंध मारने की कोशिश है ! क्षेत्रीय पार्टिया जो मुख्य रूप से ज़ातीगत राजनीती पर केन्द्रित हैं उनके लिए ये आंकड़े वरदान सिद्ध होंगे !
जहाँ तिलक तराजू का बोलबाला होगा वहाँ तिलक तराजू वाले प्रत्यासी और जहाँ बहुजन होंगे वहाँ बहुजन प्रत्यासी ! पिछले उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में बहन मायावती ने जो जाती आधारित खेल दिखाया ( बहुजन से सर्वजन की ओर ) वो बाकी पार्टियों के लिए अब एक शिक्षा साबित हो रही है, और अमूमन बाकी पार्टियाँ इसी खेल को अपनाने का दम भरते प्रतीत हो रहीं हैं !
चन्द वोटों के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए खेला जाने वाला खेल अब आंकड़ो और समीकरणों के साथ खेला जाएगा ! क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को परे रखकर, जातिगत मुद्दों को हर क्षेत्र में अलग अलग तरीके से उछाला जाने लगे, तो किंचित मात्र भी आश्चर्य नही होना चाहिए ! सदन में बैठ कर ये हमारे नेता नियमों और कानूनों के माध्यम से कई बार कुछ ऐसी चीजे थोप देते हैं जिसे स्वीकार्य करने के अलावा हमारे पास कोई और रास्ता नही बचता ! और अपना व्यक्तिगत हित देख सभी पार्टिया एक ही दिशा में दौड़ती नजर आने लगती है, जबकि राष्ट्रवादी मुद्दों या विकास के मुद्दों पर ये पार्टियाँ कभी ऐसे एकजुट नही दिखती !
क्या ये आंकड़े आ जाने के बाद हम कह सकते हैं की आरक्षण या जाती आधारित राजनीती नही होगी ! मेरा व्यक्तिगत मत यह है की इसके बाद हर पार्टी हर रंग का झंडा लिए हुए नजर आएगी और आरक्षण की मांग बढती ही जाएगी !
~
समय है परिवर्तन का ! युवा नेतृत्व और सोच को आगे लाने का !
हाथ बढाएँ ! हाथ मिलाएं !!

सुयश दीप राय
यूथ डेमोक्रेटिक फ्रंट

Thursday, May 27, 2010

कुछ मन की बातें...... नमन अटल जी को !!


"हार नहीं मानूंगा ,रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं,
गीत नया गाता हूं गीत नया गाता हूं । "

भारतीय राजनीति के पुरोधा ( युग पुरुष, स्तम्भ पुरुष ,क्या कहूँ उन्हें सारे अलंकरण छोटे पद जाते हैं उनके कद के सामने ) श्रद्धेय अटल जी की ये कविता आज पढ़ रहा था ! मन अचानक विचलित हो उठा जब ये सोचता हू की अब उनकी उम्र ज्यादा देर तक साथ नही देगी ! एक अन्दर टीस सी उठती है , की काश आज भी वो राजनीती में सक्रिय होते तो हमारी आने वाली पीढ़ी एक इस शशक्त राजनेता ( एक वास्तव में राजनेता ) की प्रतिभा को जान पाती ! उनका नाम सुनते ही , पूरा शरीर प्रणाम करने की मुद्रा में आ जाता है ! वीरों की गाथाएँ सुनी थी, लेकिन ऐसे सामने खड़े ऐसे इतिहास पुरुष ( निर्भीक व साहसी) को मैं देख पाया, बड़ा सौभाग्य है मेरा ! उनके हर एक भाव से सीखने को मिलता है कुछ ना कुछ ! साथी क्या विरोधी क्या, सभी उनके आगे नतमस्तक होते हैं ! आज भी याद है, जब संसद में वो खड़े होते थे तो एक एक सांसद उनकी बात को ऐसे सुनता था जैसे कोई बड़ा संत प्रवचन दे रहा हो ! सामने लाखों की भीड़ को अपनी सम्मोहन क्षमता से ऐसे बाँध देते थे की क्या कहने !विपक्ष भी कभी कभी सोचता था , की अटल जी बातों का विरोध करें भी तो कैसे करें !राजनीती में उनके कद के आगे कोई भी नेता बौना सा प्रतीत जो होता था ! धुर विरोधियों का भी दिल जीत लेने की एक अलग कला थी उनमे ! तालियों की गडगडाहट कभी उन्हें विचलित नही करती थी, और वो वैसे ही विनम्र मुश्कान के साथ सबका अभिवादन करते थे ! उनके मुख पर हमेशा विराजमान रहने वाली यह मधुर मुस्कान किसी का भी दिल जीत लेती थी !
भारतीय राजनीती के सर्वकालीन महानतम राजनेता कवि ह्रदय श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी जी को मेरा शत शत नमन ! अब बस यही प्रार्थना है, इश्वर उनको दीर्घायु प्रदान करे !
~ सुयश दीप राय